||जय महामंगल||

ॐ धरणी गर्भसम्भूतं विदुयतकान्ति- समप्रभम् | कुमारं शक्तिहस्तं च मंगलम् प्रणमाम्यहम ||




पुजारी पृथ्वीराज भारती

फ़ोन नंबर :- 09826042506

   " ऋणमोचन मंगल स्त्रोत "

   || ॐ क्रां क्रीं क्रों सःॐ भूर्भुवः स्वः ॐ ||

   मंगलो भुनिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः |स्थिरासनो महाकायःसर्वकर्मविरोधक ||1||

   लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकर |धरात्मजः कुजौ भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः ||2||

   अंगडारको यमश्चैव सर्वरोगापहारक |वृष्टेः करताद्पहर्ता च सर्वकामफलप्रदः ||3||

   एतानि कुज्नामानि नित्यं यःश्रद्धया पठेत् |ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात् ||4||

   धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम् |कुमारं शक्तिहस्तं च मंगलम प्रणमाम्यहम् ||5||

   || ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः क्रों क्रीं क्रां ॐ ||


|| महत्व ||



|| ॐ नमः शिवाय ||

स्कंध पुराण के अनुसार नवग्रहों में से मंगलग्रह का जन्म स्थान (अवंतिका) उज्जैन शिप्रा तट पर विधमान है , स्कन्धपूर्ण के अनुसार उज्जैन में अंधकासुर नमक दैत्य ने भगवन शिव की तपस्या के शिव से ये वरदान प्राप्त किया की मेरा रक्त भूमि पर गिरे तो मेरे जैसे अनेक राक्षस उत्पन्न हो जाय, अंधकासुर ने ऐसा वरदान प्राप्त कर पृथ्वी पर त्राहि-त्राहि मचा दिया दी..सभी ऋषियों,मुनियो और मनुष्यो का वध करना शुरे कर दिया...सभी देवगढ़ ,ऋषि मुनि एवं मनुष्य भगवन शिव के पास गए और सभी ने ये प्रार्थना की- आप ने अंधकासुर को जो वरदान दिया है कि उसका निवारण करे..भगवन शिव ने स्वयं अंधकासुर से युद्ध करने का निर्णय लिया ... शिव और अंधकासुर के बीच आकाश में भीषण युद्ध कई वर्षो तक चला ...


युद्ध करते समय शिव के ललाट से पसीने कि एक बून्द भूमि के गर्भ पर गिरी..उस बून्द से मंगल गृह कि भूमि के गर्भ से शिव पिंडी स्वरुप में उत्पत्ति हुई...जब अंधकासुर का वध किया, तब जो रक्त कि बुँदे आकाश में से गिरने लगी तो शिव पुत्र मंगल ने अपने ऊपर लेकर भस्म कर दी...और भगवन शिव के द्वारा अंधकासुर का वध हो गया..शिव पुत्र के द्वारा अंधकासुर का वध हो गया ...


शिव पुत्र मंगल बहुत ही उग्र अंगारक स्वरुप के हो गए..सभी ऋषियों मुनियो देवताओ एवं ब्रम्हाजी ने सर्व प्रथम मंगल कि उग्रता कि शांति के लिए दही और भट का लेपन किया था... मंगल गृह अंगारक एवं कुजनाम से भी जाने जाते है..मेष एवं वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल...इनका वर्ण लाल है ...इनके इष्ट देव भगवन शिव है..नवग्रह में मंगल गृह सेनापति के पद पर विधमान रहते है..मंगल गृह का वहां मेंडा है ..जीवन में ग्रहो का बहुत महत्व है..जन्म से ही मनुष्य ग्रहो के अधीन रहता है...ग्रहो के आधार पर ही मनुष्य अपने कार्य करता है...



|| ॐ शांति ॐ ||

|| गायत्री मंत्र ||

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्


|| ॐ पर्वते नमः ||

ऊॅ हौं जूं सः। ऊॅ भूः भुवः स्वः ऊॅ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उव्र्वारूकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। ऊॅ स्वः भुवः भूः ऊॅ। ऊॅ सः जूं हौं।

|| गणेश मंत्र ||

ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्।


|| शूकर-दन्त वशीकरण मन्त्र ||

“ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं वाराह-दन्ताय भैरवाय नमः।”


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